इंदौर शहर में दो दिवसीय "प्राकृतिक प्रसव कार्यशाला" (Natural Birthing Workshop) कैवल्य वैलनेस हब द्वारा 9-10 फरवरी 2024 को आयोजित की गयी। इस कार्यशाला का उद्घाटन पद्मश्री जनक पल्टा जी द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि आज भी आदिवासी समाज व ग्रामीण तबकों में प्राकृतिक प्रसब होता है। यह देखना चाहिये कि शहरों में महिलाएँ प्राकृतिक प्रसव से क्यों दूर जा रही हैं। इस कार्यशाला में निम्नलिखित वक्तागण थे।

- डा. उषा उकण्डे जी – मिडवाइफरी (midwifery) विशेषज्ञ व चौइथराम नर्सिंग कालेज, इंदौर की भूतपूर्व प्रधानाध्यापक (Principal),
- लीना गांधी जी (दिल्ली से) – लमाज़ इन्स्ट्रक्टर व श्रीमति नूतन पंडित जी व लमाज़ में लगे अन्य लोगों के प्रतिनिधि के रूप में,
- शमशाद परवीन जी (सतना, म.प्र. से) – लव व लाइट् ध्यान केन्द्र संचालक,
- वैद्य शेफाली – आयुर्वेद चिकित्सक, नाड़ी परीक्षक व गर्भ संस्कार विशेषज्ञ, कैवल्य आयुर्वेद इंदौर,
- डा. मीनल सोमानी – फिजियोथेरेपिस्ट, काइरोप्रैक्टिशनर, होलिस्टिक केन्द्र, राव, इंदौर,
- सरिता परमार – योग व पिरामिड ध्यान प्रचारक, इंदौर

डा. उषा ने अपना अनुभव साझा किया कि कैसे उन्होंने ‘स्व’ नामक प्राकृतिक प्रसव केन्द्र चौइथराम अस्पताल में खोला व कोविड होने तक ५ वर्ष चलाया। इसके कारण औपरेशन से होने वाले प्रसव कम हो गए। उन्होंने बताया कि पारम्परिक दाई व्यवस्था के अन्तर्गत अधिकांश प्रसव प्राकृतिक होते थे। समाज में महिलाओं के लिये यह व्यवस्था एक मजबूत स्तम्भ के रूप में खड़ी थी, जो कि आज टूट चुकी है। डा. उषा ने अपने वक्तव्य में बताया कि एक मिडवाइफ (midwife) तीन गुणों से, अर्थात (1) expertise (निपुणता) (2) intuition (दक्षता) व (3) wisdom (विवेक) से, सम्पन्न होने से वे गर्भिणी को भली-भाँति, सुरक्षित व आराम से प्रसव करा सकती हैं।
लीना जी ने, जो स्वयं लमाज़ इन्स्ट्रक्टर हैं, अपने वक्तव्य में बताया कि कैसे विभिन्न प्रकार से श्वास लेने के तरीकों से प्राकृतिक प्रसव में सहयोग मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे गर्भवती महिला के साथ, उसके पति को भी प्रशिक्षण देते हैं। अर्थात् दम्पत्ति युगल को गर्भावस्था व प्रसव सम्बन्धित सही सूचना देते हैं, व उनकी तैयारी कराते हैं।
लीना जी ने विश्व के मिडवाइफरी पराम्परा का एतिहासिक पहलू भी विस्तार से बताया के कैसे 16वीं सदी में गर्भावस्था एक बीमारी के रूप में यूरोप में घोषित हुआ, कैसे दाई व्यवस्था को गैर-कानूनी करार दिया गया, व कानून की शक्ति से डाक्टर की भूमिका का प्रारम्भ हुआ।
डा. मीनल सोमानी जी ने बताया कि कैसे पैल्विक (कूल्हे की) माँसपेशियों की सुरक्षा व स्वास्थ्य को बनाए रखने से महिला स्वास्थ्य अच्छा बना रह सकता है। अर्थात् सभी आयु वर्ग की महिलाओं को सम्पूर्ण तरीके से स्वस्थ होने के लिये जागरूक होना है – चाहे विवाहित हो या अविवाहित। उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक प्रसव के लिये पैल्विक माँसपेशियों को मजबूत करना आवश्यक होता है। उसके लिये उन्होंने कुछ सरल व्यायाम (exercises) भी सुझाये।
वैद्य शेफाली ने आयुर्वेद की दृष्टि से गर्भ संस्कार की विभिन्न अवस्थाओं या सीढ़ियों (stages) के बारे में बताया। कैसे गर्भाधान किया जा सकता है जिससे कि आनुवांषिक दोषों (genetic defects) से मुक्त तथा स्वस्थ मन से युक्त गर्भ-धारण हो व स्वस्थ शिशु पैदा हो। प्रसव प्राकृतिक रूप से हो – इसके सम्बन्धित आयुर्वेद में बताई गईं अनेकों विधियाँ व आहार का महत्त्व बताया। और कैसे एक महिला अपनी शक्ति को पहचानती है, जब वह स्वयं प्राकृतिक प्रसव से गुजरती है। उन्होंने वैद्य पी.एल.टी गिरिजा, चैन्नई के अनुभवों से उदाहरण भी बताए। गर्भावस्था में अच्छे संगीत, अच्छी किताब का महत्त्व भी स्पष्ट किया।
शमशाद परवीन जी ने अपना अनुभव साझा किया कि कैसे अपने दृढ़ संकल्प के कारण उनके तीनों बच्चों का प्राकृतिक प्रसव व बिना किसी ड्रिप के हुआ, जबकि तीसरा बच्चा उल्टा पैदा हुआ। ध्यान व संकल्प शक्ति से गर्भवती महिलाएँ प्राकृतिक प्रसव कर सकती हैं।
सरिता परमार जी ने अपना अनुभव साझा किया कि कैसे ध्यान योग व पिरामिड के प्रयोग से प्राकृतिक प्रसव व स्वस्थ गर्भावस्था में बहुत बड़ा सहयोग मिल सकता है।
सभी वक्ताओं की प्रस्तुति के बाद, वर्तमान में क्या-क्या करना चाहिये, इस पर चर्चा हुई। कुछ बिंदु यहाँ दिये जा रहे हैं:-
- महिला – डूला प्रशिक्षण (doula training),
- महिला स्वास्थ्य के बारे में जानकारी (awareness) के सैशन,
- सहयोगी समूह (support group) बनाना,
- कोर्स तैयार किये जायें जिनके माध्यम से नर्स, मिडवाइफ, व डाक्टर को प्राकृतिक प्रसव के बारे में प्रशिक्षित किया जा सके,
- जो महिलाएँ प्राकृतिक प्रसव की इच्छुक हैं, उन्हें पूरी तैयारी के साथ लिया जाय। इसमें डा. शेफाली उषा मैडम के मार्ग दर्शन में पहल करे, व अस्पताल से भी जुड़ें जिससे कि आवश्यकता होने पर शल्य चिकित्सा भी की जा सके।
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